Indian History

भारतीय राष्ट्रीय स्वतंत्रता आन्दोलन

भारतीय राष्ट्रीय स्वतंत्रता आन्दोलन

(प्रथम चरण (1885-1905 ई.)

० भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना (1885)

० 1885-1905 ई. के मध्य कांग्रेस की मुख्य भूमिका भारतीय राजनीतिज्ञों को एकता व प्रशिक्षण के लिए एक मंच प्रदान करने के रूप में थी। दादाभाई नौरोजी ने ‘पॉवर्टी एंड अन ब्रिटिश रूल इन इंडिया’ लिखकर अंग्रेजों द्वारा भारत के आर्थिक शोषण को उजागर किया।

[द्वितीय चरण (1905-19): बंगाल का विभाजन व स्वदेशी आन्दोलन (1905 ई) . वायसराय लॉर्ड कर्जन ने देशभक्ति के उफनते सैलाब को रोकने के लिए राष्ट्रीय गतिविधियों के केन्द्र बंगाल के विभाजन की घोषणा 20 जुलाई, 1905 को की।

० 1905 में गोपाल कृष्ण गोखले की अध्यक्षता में कांग्रेस का बनारस अधिवेशन आयोजित हुआ। इस अधिवेशन में बंग-भंग की निंदा की गई तथा स्वदेशी व बहिष्कार आन्दोलन का  अनुमोदन किया गया। बंगाल विभाजन के विरोध में स्वदेशी एवं बहिष्कार आदोलन प्रारम्भ हुआ।

० कड़े विरोध के कारण 1911 ई. में सरकार को बंग-भंग का आदेश वापस लेना पड़ा। यह निर्णय जॉर्ज पंचम के दिल्ली दरबार (1911) में लिया गया, जो 1912 ई. में लागू हो गया।

मुस्लिम लीग (1906)

भारतीय मुसलमानों में अंग्रेजी सरकार के प्रति वफादारी लाने के उद्देश्य से ढाका के नवाब सलीमुल्लाह व आगा खान के नेतृत्व में 30 दिसम्बर, 1906 को ढाका में ब्रिटिश समर्थक मुसलमानों ने अखिल भारतीय मुस्लिम लीग की स्थापना की।

* इसके प्रथम अध्यक्ष वकार-उल-मुल्क थे।

सूरत अधिवेशन (1907 ई.)

* सूरत अधिवेशन (1907) में कांग्रेस ‘नरमपंथी’ और गरमपंथी’ दो अलग-अलग गुटों में विभक्त।

* लाला लाजपतराय, बाल गंगाधर तिलक व विपिन चन्द्र पाल (लाल-बाल-पाल) गरम दल के प्रमुख नेता थे।

दिल्ली दरबार (1911) :

* तत्कालीन वायसराय लॉर्ड हॉर्डिंग ने दिसम्बर 1911 में ब्रिटिश सम्राट जॉर्ज पंचम और क्वीन मेरी के आगमन पर 12 दिसम्बर, 1911 को दिल्ली में भव्य दरबार का आयोजन करवाया। इसी दरबार में बंगाल विभाजन को रद्द करने तथा राजधानी कलकता से दिल्ली स्थानान्तरित करने की घोषणा की गई।

* 1 अप्रैल, 1912 को दिल्ली को कलकता की जगह  भारत की नयी राजधानी बनाया गया।

हार्डिंग बम काण्ड (1912)

* 1912 में रास बिहारी बोस तथा शचीन्द्रनाथ सान्याल ने वायसराय लॉर्ड हॉर्डिंग के काफिले पर दिल्ली के चाँदनी चौक में बम फेंका।

लखनऊ समझौता (1916 ई.)

* देश में बढ़ रही राष्ट्रवादी भावना और राष्ट्रीय एकता की आकांक्षा के कारण 1916 ई. में कांग्रेस के लखनऊ अधि वेशन में ऐतिहासिक महत्व की दो घटनाएँ हुई 1. कांग्रेस के दोनों पक्ष(नरम दल व गरम दल) पुनः एक हो गए।

* कांग्रेस व मुस्लिम लीग के मध्य समझौता हो गया।

होमरूल आन्दोलन (1916 ई.)

* आयरलैण्ड के होमरूल लीग की तर्ज पर इसे भारत में .एनी बेसेंट तथा लोकमान्य तिलक ने प्रारम्भ किया

रौलेट एक्ट (1919 ई.)

* बढ़ रही क्रान्तिकारी गतिविधियों को कुचलने के लिएसरकार ने 1917 में न्यायाधीश सिडनी रौलेट की अध्यक्षता में एक समिति को नियुक्त किया जिसे आतंकवाद को कुचलने के लिए एक प्रभावी योजना का निर्माण करना था।

रौलेट समिति के सुझावों के आधार पर केन्द्रीय विधान परिषद ने एक विधेयक पारित किया जिसे रौलेट एकर कहा जाता है।

* रौलेट अधिनियम के द्वारा अंग्रेजी सरकार जिसको चारे जब तक चाहे बिना मुकदमा चलाये जेल में बन्द रख सकती थी, इसीलिए इस कानून को ‘बिना वकील बिना अपील, बिना दलील का कानून’ कहा गया।

* गांधी जी ने इसको काले कानून की संज्ञा दी।

जलियांवाला बाग हत्याकाण्ड 1919

० 13 अप्रैल, 1919 को (वैशाखी का दिन) अमृतसर के जलियाँवाला बाग में गोलीकाण्ड और नेताओं (किचलू, सत्यपाल) की  गिरफ्तारी के विरुद्ध एक शांतिपूर्ण सभा का आयोजन किया गया था।.

० सभा स्थल पर उपस्थित अंग्रेज जनरल ओ डायर ने बिना कोई पूर्व सूचना या चेतावनी के भीड़ पर गोली चलवा दी जिसमें करीब 1000 लोग मारे गये। सरकारी रिपोर्ट के अनुसार 10 मिनट तक हुई गोलीबारी में करीब 379 व्यक्ति मारे गये और 1200 घायल हुए। हत्याकाण्ड के विरोध में रवीन्द्र नाथ टैगोर ने नाइट की उपाधि वापस कर दी, वायसराय की कार्यकारिणी के सदस्य शंकर नायर ने त्याग पत्र दे दिया।

० कांग्रेस ने जलियांवाला बाग हत्याकाण्ड की जांच हेतु मदन मोहन मालवीय की अध्यक्षता में एक समिति की नियुक्ति की गई। समिति के अन्य सदस्य थे- मोतीलाल नेहरू, महात्मा गांधी, सी.आर. दास, तैय्यबजी और जयकर आदि।

(तृतीय चरण (1919-1947 ई.)

० राष्ट्रीय आंदोलन के तृतीय चरण (1919-1947) को

गाँधी युग के नाम से जाना जाता है। मोहन दास करमचंद गांधी 9 जनवरी, 1915 को दक्षिण अफ्रीका से भारत वापिस आये। भारत में गोपाल कृष्ण गोखले के विचार ने गांधी जी का सर्वाधिक प्रभावित किया, कालांतर में गोखले को गांधी जा ने अपना राजनीतिक गुरु बना लिया।

० जिस समय गाँधी जी भारत आये उस समय प्रथम महायुद्ध, दौर चल रहा था, उन्होंने सरकार के युद्ध प्रयासों में मदद जिसके लिए सरकार ने उन्हें कैसर-ए-हिन्द सम्मान

सम्मानित किया। गांधी जी ने भारत आने पर 1915 में अहमदाबाद के समीप साबरमती नदी के किनारे सत्याग्रह आश्रम की स्थापना की। गांधी जी ने 1909 में लिखी अपनी पुस्तक हिन्द स्वराज्य

(गुजराती भाषा) में स्वराज (स्वशासन) की विस्तृत व्याख्या की। 9 भारत में 1917 से 1918 के बीच गांधी जी ने तीन संघर्ष चंपारण और खेड़ा का किसान आंदोलन तथा अहमदाबाद के मजदूर आंदोलन का सफल नेतृत्व किया।

चंपारण सत्याग्रह (1917) के समय ही पहली बार गांधी जी ने भारत में सत्याग्रह करने की धमकी दी थी। चंपारण सत्याग्रह के सफल नेतृत्व के बाद ही रवीन्द्रनाथ टैगोर ने गांधी जी को पहली बार महात्मा कहा।

० खेड़ा सत्याग्रह (1918) भारत में गांधी जी द्वारा चलाया गया पहला वास्तविक किसान सत्याग्रह था।

० महात्मा गांधी के नेतृत्व में तीन आन्दोलन चलाये गये – असहयोग, सविनय अवज्ञा तथा भारत छोड़ो आन्दोलन

असहयोग आन्दोलन (1920 से 1922)

* कांग्रेस के नागपुर अधिवेशन (1920) में असहयोग के  प्रस्ताव की पुष्टि कर दी गई। असहयोग आन्दोलन गांधीजी द्वारा 1 अगस्त, 1920 को शुरू कर दिया गया। चौरी-चौरा काण्ड : 5 फरवरी, 1922 को गोरखपुर जिले के चौरी-चौरा नामक स्थान पर पुलिस ने जबरन एक जूलुस को रोकना चाहा, इसके फलस्वरूप जनता ने क्रोध में आकर थाने में आग लगा दी जिसमें एक थानेदार व 21 सिपाहियों की मृत्यु हो गई। चौरी-चौरा की घटना से 12 फरवरी, 1922 को बारदोली में हुई कांग्रेस की बैठक में असहयोग आन्दोलन को समाप्त करने का निर्णय लिया गया।

स्वराज पार्टी की स्थापना (1923)

* चितरंजन दास और मोती लाल नेहरू ने मार्च 1923 में इलाहाबाद में ‘कांग्रेस खिलाफत स्वराज पार्टी’ की स्थापना की जो स्वराज दल कहलाया। सी. आर. दास इसके अध्यक्ष थे।

काकोरी षडयंत्र, (1925)

* अक्टूबर, 1924 ई. में शचीन्द्र सान्याल, रामप्रसाद बिस्मिल तथा चन्द्रशेखर आजाद ने कानपुर में क्रान्तिकारी संस्था हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन’ की स्थापना की। इस संस्था द्वारा 9 अगस्त, 1925 को उत्तर रेलवे के लखनऊ सहारनपुर संभाग के काकोरी नामक स्थान पर डकैती डाल कर सरकारी खजाना लूटा गया। यह घटना काकोरी कांड के नाम से प्रसिद्ध हुई। इस कांड में 29 क्रांतिकारियों को गिरफ्तार किया गया, जिसमें रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला, रोशनलाल तथा राजेन्द्र लाहिड़ी को फांसी हुई, जबकि चन्द्रशेखर आजाद फरार हो गये।

साइमन कमीशन (1927-28)

* साइमन आयोग का गठन नवम्बर, 1927 में किया,जिसके अध्यक्ष सर जॉन साइमन तथा सभी सातों सदस्य अंग्रेज थे। . इस आयोग में एक भी भारतीय सदस्य को नियुक्त न किये जाने के कारण इसके बहिष्कार का निर्णय लिया गया।

* 3 फरवरी, 1928 का आयोग बम्बई पहुँचा, उस दिन पूरी बम्बई में हड़ताल का आयोजन कर काले झण्डे के साथ साइमन वापस जाओ’ के नारे लगाये गये।

कांग्रेस का लाहौर अधिवेशन (1929) :

* कांग्रेस के ऐतिहासिक लाहौर अधिवेशन की अध्यक्षता पं. जवाहर लाल नेहरू ने की। इस अधिवेशन में पारित पूर्ण स्वराज्य के प्रस्ताव के अनुसार कांग्रेस के संविधान में स्वराज्य शब्द का अब से अर्थ पूर्ण स्वतंत्रता या पूर्ण स्वराज्य होगा इसे ही अब राष्ट्रीय आंदोलन का लक्ष्य निर्धारित किया गया।

* 31 दिसम्बर, 1929 की मध्यरात्रि को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का लाहौर अधिवेशन हुआ। इस अधिवेशन में पहली बार ‘तिरंगा झण्डा’ पूर्ण स्वराज्य, वंदेमातरम तथा इंकलाब जिन्दाबाद के नामों के बीच फहराया।

* कांग्रेस कार्य समिति द्वारा 2 जनवरी, 1930 को अपनी बैठक में यह निर्णय किया गया 26 जनवरी, 1930 का दिन पूर्ण स्वराज्य दिवस के रूप में मनाया जायेगा तथा 26 जनवरी को प्रत्येक वर्ष पूर्ण स्वाधीनता दिवस के रूप में मनाया जायेगा। 26 जनवरी, 1930 को आधुनिक भारत के इतिहास में प्रथम स्वतंत्रता दिवस के रूप में माना जाता है। (26  जनवरी के इसी महत्त्व के कारण कालान्तर में भारत का संविधान 26 जनवरी, 1950 को लागू किया गया)

सविनय अवज्ञा आन्दोलन (1930-1934 ई.)

* सविनय अवज्ञा आन्दोलन गांधीजी ने कांग्रेस की माँगे पूरी नहीं होने के विरोध में 1930 में प्रारंभ किया। दांडी यात्रा : 12 मार्च, 1930 को साबरमती आश्रम से गांधीजी ने अपने 78 समर्थकों के साथ डांडी के लिए यात्रा प्रारम्भ की तथा 24 दिन में 385 किलोमीटर की पदयात्रा के पश्चात् 5 अप्रैल को डांडी पहुँचे तथा 6 अप्रैल को नमक कानून तोड़ा। आंदोलन का कार्यक्रम –

  1. नमक कानून तथा ब्रिटिश कानूनों का उल्लंघन।
  2. कानूनी अदालतों, सरकारी विद्यालयों, महाविद्यालयों एवं सरकारी समारोहों का बहिष्कार।
  3. भूराजस्व, लगान तथा अन्य करों की अदायगी पररोक।
  4. शराब तथा अन्य मादक पदार्थों का विक्रय करने वाली दुकानों पर शांतिपूर्ण धरना।
  5. विदेशी वस्तुएँ एवं कपड़ों का बहिष्कार।
  6. सरकारी नौकरियों से त्याग पत्र।

आंदोलन की प्रगति –

सविनय अवज्ञा आंदोलन गांधी के नेतृत्व में समूचे भारत में फैल गया। पश्चिमोत्तर सीमा प्रांत के नुसलमानों ने खान अब्दुल गफ्फार खां (सीमांत गांधी) के नेतृत्व में सविनय अवज्ञा आंदोलन चलाया। खान अब्दुल गफ्फार खां के नेतृत्व में गठित खुदाई खिदमतगार या लालकुर्ती के संगठन अवज्ञा आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभायी। सविनय अवज्ञा आंदोलन के समय गुजरात के खेड़ा, सूरत जिले तथा बारदोली तहसील में कर न अदायगी का आंदोलन चलाया गया। . जिस समय यह आंदोलनअपने चरमोत्कर्ष पर था उसी समय वायसराय ने गिरफ्तार कांग्रेस नेताओं को रिहा करने की पहल कर महात्मा गांधी को बात-चीत करने के लिए आमंत्रित किया। इरविन-गांधी जी के बीच समझौते पर माहौल बनाने में तेजबहादुर सप्रू तथा एम.आर. जयकर ने महत्त्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह किया।

गांधीइरविन समझौता (1931) .

द्वितीय गोलमेज सम्मेलन के पूर्व महात्मा गांधी और तत्कालीन वायसराय लार्ड इरविन के बीच एक राजनीतिक समझौता हुआ जिसे गांधी-इरविन समझौता कहते हैं। 5 मार्च, 1931 को हुए समझौते में लार्ड इरविन ने स्वीकार किया कि ..

  1. हिंसा के आरोपियों को छोड़कर बाकि सभी राजनीतिक बन्दियों को रिहा कर दिया जायेगा।
  2. भारतीयों को समुद्र किनारे नमक बनाने का अधि कार दिया गया।
  3. भारतीय शराब एवं विदेशी कपड़ों की दुकानों के सामने धरना दे सकते हैं। आंदोलन के दौरान त्याग-पत्र देने वालों को उनके पदों पर पुनः बहाल किया जायेगा। आंदोलन के दौरान जब्त सम्पत्ति वापस की जायेगी।

कांग्रेस की ओर से गांधी जी ने निम्न शर्ते स्वीकार की

  1. सविनय अवज्ञा आंदोलन स्थगित कर दिया जायेगा।
  2. कांग्रेस द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में भाग लेगी।
  3. कांग्रेस ब्रिटिश सामान का बहिष्कार नहीं करे
  4.  गांधीजी पुलिस की ज्यादतियों की जाँच की छोड़ देंगे।

* यह समझौता इसलिए महत्त्वपूर्ण था क्योंकि पहली बार ब्रिटिश सरकार ने भारतीयों के साथ समानता के स्तर समझौता किया।

द्वितीय गोलमेज सम्मेलन (1931)

* 7 सितम्बर, 1931 को द्वितीय गोलमेज सम्मेलन शरू हुआ। गांधीजी 12 सितम्बर, को ‘एस.एस. राजपुताना’ नामक जहाज़ से इंग्लैण्ड पहुँचे। इस सम्मेलन में गाँधीजी कांग्रेस के एकमात्र प्रतिनिधि थे। एनी बेसेन्ट एवं मदन मोहन मालवीय व्यक्तिगत रूप से इंग्लैण्ड गये थे। एनी बेसेन्ट ने सम्मेलन में शामिल होकर भारतीय महिलाओं का प्रतिनिधित्व किया। द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में कुल 21 लोगों ने भाग लिया था।

* डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने तीनों गोलमेज सम्मेलनों में भाग लिया था।

साम्प्रदायिक निर्णय (1932 ई.) .

* ब्रिटेन के प्रधानमंत्री रैम्जे मैकडोनाल्ड ने 16 अगस्त, 1932 ई. को साम्प्रदायिक पंचाट या कम्युनल अवार्ड की घोषणा की।

* दलित वर्गों को अल्पसंख्यक करार देकर उन्हें पृथक निर्वाचन द्वारा प्रतिनिधि चुनने एवं साधारण निर्वाचन में  एकमत देने का एकाधिकार मिला।

पूना समझौता (1932 ई.) ..

* दलितों को पृथक निर्वाचन देने के विरोध में 20 सितम्बर, 1932 ई. को गांधीजी ने जेल में आमरण अनशन किया।

* 26 सितम्बर, 1932 को गांधीजी व डॉ. भीमराव अम्बेडकर के बीच समझौता हुआ, जो पूना पैक्ट के नाम से जाना जाता है। इस समझौते में डॉ. अम्बेडकर को साम्प्रदायिक निर्णय के अधिकार को छोड़ना पड़ा। सितम्बर, 1932 में गांधीजी द्वारा अखिल भारतीय अस्पृश्यता . संघ की स्थापना की गयी।

* गांधीजी द्वारा 1933 ई. में ‘हरिजन पत्र’ का प्रकाशन किया गया।

द्वितीय सविनय अवज्ञा आंदोलन (1932-34)

* 1 जनवरी, 1932 को कांग्रेस कार्यसमिति ने सविनय अवज्ञा आंदोलन को दोबारा शुरू करने का निर्णय लिया। आंदोलन शुरू होने के शीघ्र बाद चोटी के नेता गाधा, नेहरू, खान अब्दुल गफ्फार खां आदि को गिरफ्तार कर सरकार ने कांग्रेस को गैरकानूनी संस्था घोषित कर I उसकी सम्पत्ति को जब्त कर दिया।

क्तिगत सत्याग्रह (1940 ई.)

* 1940 ई. में कांग्रेस ने गांधीजी के नेतृत्व में व्यक्तिगत सत्याग्रह शुरू करने का निर्णय किया।

* 17 अक्टूबर, 1940 को व्यक्तिगत सत्याग्रह प्रारम्भ हो गया जिसमें प्रथम सत्याग्रही विनोबा भावे एवं दूसरे सत्याग्रही जवाहर लाल नेहरू थे।

क्रिप्स मिशन (1942 ई.)

* भारत की राजनीतिक समस्या का उचित समाधान करने के लिए ब्रिटेन के प्रधानमंत्री चर्चिल ने मार्च 1942 में एक प्रतिनिधिमण्डल भारत भेजा, जिसे क्रिप्स मिशन कहा जाता है। चर्चिल के मंत्रिमण्डल में एक प्रमुख सदस्य स्टैफर्ड क्रिप्स इसके अध्यक्ष थे।

* महात्मा गांधी ने क्रिप्स प्रस्ताव को उत्तरदिनांकित चेक (Postdated cheque) की संज्ञा दी।

भारत छोड़ो आंदोलन (1942) .

* भारत छोड़ो आंदोलन या अगस्त क्रान्ति भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की अन्तिम महान लड़ाई थी, जिसने ब्रिटिश शासन की नींव को हिलाकर रख दिया। दूसरी ओर दूसरे विश्वयुद्ध के कारण परिस्थितियाँ अत्यधिक गम्भीर होती जा रही थीं। जापान सफलतापूर्वक सिंगापुर, मलाया और बर्मा पर कब्जा कर भारत की ओर बढ़ने लंगा, दूसरी ओर युद्ध के कारण तमाम वस्तुओं के दाम बेतहाशा बढ़ रहे थे, जिससे अंग्रेज सत्ता के खिलाफ भारतीय जनमानस में असन्तोष व्याप्त होने लगा था। जापान के बढ़ते हुए प्रभुत्व को देखकर 5 जुलाई, 1942 को गांधी जी ने हरिजन में लिखा ‘अंग्रेजो! भारत को जापान के लिए मत छोड़ो, बल्कि भारत को भारतीयों के लिए व्यवस्थित रूप से छोड़ जाओ।’ ।

* 14 जुलाई, 1942 को वर्धा में आयोजित कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक भारत छोड़ो आंदोलन पर एक प्रस्ताव पारित किया गया। 14 जुलाई, 1942 को भारत छोड़ो प्रस्ताव के कांग्रेस कार्यसमिति द्वारा पास किये जाने से पूर्व गांधी जी ने कांग्रेस के अंदर भारत छोड़ो प्रस्ताव के विरोधियों को चुनौती देते हुए कहा कि “यदि संघर्ष का उनका प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया जाता तो मैं देश की बालू से ही कांग्रेस से बड़ा आंदोलन खड़ा कर दूंगा।” 7 अगस्त, 1942 को बम्बई के ऐतिहासिक ग्वालिया टैंक मैदान में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की वार्षिक बैठक हुई (अध्यक्षता मौलाना अबुल कलाम आजाद ने की) बैठक में वर्धा प्रस्ताव (भारत छोड़ो) की पुष्टि कर दी गई।

* ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ राष्ट्रीय स्वतंत्रता संघर्ष का प्रथम आंदोलन था जो नेतृत्वविहीनता की स्थिति में भी अपने उद्देश्य को पूरा कर सका।

* बम्बई कांग्रेस ने भारत छोड़ो प्रस्ताव को थोड़े बहुत संशोधन के बाद 8 अगस्त, 1942 को पास कर दिया। इस सम्मेलन में गांधी जी द्वारा दिये गये भाषणों का कुछ अंश इस प्रकार है- ‘सम्पूर्ण आजादी से कम किसी भी चीज से मैं संतुष्ट होने वाला नहीं, हो सकता है नमक टैक्स, शराब खोरी आदि को खत्म करने का प्रस्ताव दें। लेकिन मेरे शब्द होंगे आजादी से कम कुछ भी नहीं, मैं आप को एक मंत्र देता हूँ करो या मरो (Do or Die) इस मंत्र का आशय है या तो हम भारत को आजाद करायेंगे अथवा कोशिश में अपनी जान दे देंगे।

आंदोलन की प्रगति :

भारत छोड़ो आंदोलन के 9 अगस्त, 1942 को शुरूहोते ही गांधी जी तथा अन्य चोटी के कांग्रेस नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। गांधी को गिरफ्तार कर आगा खां पैलेस में रखा गया।

सरकार ने कांग्रेस को गैरकानूनी घोषित करते हुए उसकी सम्पत्ति को जब्त कर लिया।

राजेन्द्र प्रसाद को पटना में नजरबंद कर दिया गया, . जय प्रकाश नारायण को गिरफ्तार कर हजारीबाग सेन्ट्रल जेल में रखा गया। कालांतर में जेल की दीवार को फांद कर जय प्रकाश नारायण फरार हो गये तथा 1942 के आंदोलन में भूमिगत होकर आजाद दस्ता का गठन किया। राम मनोहर लोहिया, अच्युत पटवर्धन, अरूणा आसफ अली आदि ने भूमिगत रहते हुए आंदोलन को नेतृत्व प्रदान किया। गांधी जी वैसे तो अहिंसावादी थे, मगर देश को आजाद करवाने के लिए उन्होंने ‘करो या मरो’ का मूल मंत्र दिया। अंग्रेजी शासकों की दमनकारी, आर्थिक लूट-खसूट, विस्तारवादी एवं नस्लवादी नीतियों के विरुद्ध उन्होंने लोगों को क्रमबद्ध करने के लिए ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ छेड़ा था। गांधी जी ने कहा था कि- ‘एक देश तब तक आजाद नहीं हो सकता, जब तक कि उसमें रहने वाले लोग एक-दूसरे पर भरोसा नहीं करते।’ आंदोलन के प्रति सरकार की दमनात्मक नीति के विरुद्ध गांधी जी ने आगा खाँ पैलेस में 10 फरवरी, 1943 को 21 दिन के उपवास की घोषणा कर दी। गांधी के उपवास शुरू करने के बाद देश में ही नहीं बल्कि विदेशों से भी उन्हें रिहा करने के लिए दबाव पड़ने लगा तत्कालीन भारत के सभी राजनीतिक दल केवल मुस्लिम लीग को छोड़कर गांधी की रिहाई की मांग की। जिस समय गांधी जी रिहा हुए उससे पूर्व ही उनकी पत्नी कस्तूरबा और निजी सचिव महादेव देसाई की मृत्यु हो चुकी थी।

प्रतिक्रिया :

तत्कालीन भारतीय राजनीतिक दलों में ‘साम्यवादी दल’ ने इस आंदोलन की आलोचना की। मुस्लिम लीग ने भारत छोड़ो आंदोलन की आलोचना करते हुए कहा कि ‘आंदोलन का लक्ष्य भारतीय स्वतंत्रता नहीं, वरन भारत में हिन्दू साम्राज्य की स्थापना करना है, इस कारण यह आंदोलन मुसलमानों के लिए घातक है।’ मुस्लिम लीग ने दिसम्बर, 1943 में कराची में हुए अधिवेशन में विभाजन करो और छोड़ो (बाँटों और भागों) का नारा दिया। अति उदारवादी नेता तेज बहादुर संपू ने भारत छोड़ों आंदोलन को ‘अविचारित तथा असामयिक’ माना।

भीमराव अम्बेडकर ने आंदोलन के बारे में कहा कि ‘कानून और व्यवस्था को कमजोर करना पागलपन है जब कि दुश्मन हमारी सीमा पर है।’ हिन्दू महासभा एवं अकाली दल ने भी इसकी आलोचना की।

जाद हिंद फौज :

* मार्च, 1942 में टोकियो में रह रहे भारतीय रास बिहारी बोस ने ‘इंडियन नेशनल आर्मी’ का गठन किया। ब्रिटिश भारतीय सेना के अधिकारी कैप्टन मोहनसिंह के मस्तिष्क में सर्वप्रथम आजाद हिंद फौज की स्थापना का विचार आया था। कैप्टन मोहन सिंह ने ब्रिटिश भारतीय सेना के आत्मसमर्पित सिपाहियों को लेकर मलाया में 15 दिसम्बर, 1941 को आजाद हिंद फौज का गठन किया।

* 7 जुलाई, 1943 को रास बिहारी बोस ने सुभाषचन्द्र बोस को आजाद हिंद फौज एवं इण्डियन लीग की कमान दे दी। बोस आजाद हिन्द फौज के प्रथम सेनापति थे। बोस ने 21 अक्टूबर, 1943 को सिंगापुर में अस्थायी भारत सरकार की स्थापना की। सैनिकों का आह्वान करते हुए बोस ने नारा दिया ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हे आजादी दूंगा।’

* बोस ने “दिल्ली चलो’ का नारा भी दिया।

* 6 नवम्बर, 1943 को जापानी सेना ने अंडमान-निकोबार द्वीप आजाद हिन्द फौज को सौंप दिया जिसका शहीद व स्वराज द्वीप नाम रखा गया।

कैबिनेट मिशन (1946 ई.)

* ब्रिटिश प्रधानमंत्री एटली ने 22 जनवरी, 1946 को भारत में चल रहे राजनीतिक गतिरोध को दूर करने के लिए एक उच्च स्तरीय कैबिनेट मिशन भेजने का निर्णय लिया।

* कैबिनेट मिशन के सदस्यों में शामिल थे सर स्टेफई क्रिप्स, ए. बी. अलेक्जेंडर, तथा पैथिक लारेंस। सर पैथिक लारेंस इस मिशन के अध्यक्ष थे।

* 24 मार्च, 1946 को केबिनेट मिशन भारत आया। अन्तरिम सरकार का गठन

* 24 अगस्त, 1946 को पं. नेहरू के नेतृत्व में भारत की पहली अन्तरिम राष्ट्रीय सरकार की घोषणा की गयी।

* पं. नेहरू ने 2 सितम्बर, 1946 को 11 अन्य सदस्यों के  साथ अपने पद की शपथ ली।

* अन्तरिम सरकार के सदस्य वायसराय की कार्यकारिणी  परिषद् के सदस्य थे। इस परिषद् के अध्यक्ष वायसराय तथा उपाध्यक्ष पंडित जवाहर लाल नेहरू थे। —एटली की घोषणा (20 फरवरी, 1947)

* भारत की तत्कालीन स्थिति से चिंतित होकर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एटली ने 20 फरवरी, 1947 को हाउस ऑफ कॉमन्स में घोषणा की कि अंग्रेजी सरकार जून 1948 ई. के पूर्व सत्ता भारतीयों को सौंप देगी।

माउंटबेटन योजना (1947 ई.)

माउंटबेटन ने भारत के विभाजन के लिए 3 जून, 1947. को एक योजना प्रस्तुत की, जिसे ‘माउंट बेटन योजना’ के नाम से जाना जाता है। माउंटबेटन योजना के प्रावधान के अनुसार भारत का विभाजन भारतीय संघ और पाकिस्तान में कर दिया जाये। जवाहरलाल नेहरू व सरदार पटेल ने विभाजन योजना को स्वीकार कर लिया परन्तु गांधीजी ने अन्त तक इसका विरोध किया।

* गांधीजी ने कहा ‘यदि कांग्रेस विभाजन चाहती है तो वह मेरे मृत शरीर पर ही होगा क्योंकि जब तक मैं जीवित हूँ भारत को विभाजित नहीं होने दूंगा।’

भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम (1947 ई.) .

* ब्रिटिश पार्लियामेंट ने 4 जुलाई, 1947 ई. को भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम प्रस्तावित किया जो 18 जुलाई, 1947 ई. को स्वीकृत हो गया।

* इस अधिनियम के मुख्य बिन्दु निम्न थे  दो अधिराज्यों की स्थापना . दोनों के लिए अलग-अलग गवर्नर जनरल। . भारत मंत्री के पद का अन्त

* इस प्रकार 14 अगस्त, 1947 को पाकिस्तान का निर्माण हुआ और ठीक 12 बजे रात्रि को 15 अगस्त, 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ। जिन्ना पाकिस्तान के गवर्नर जनरल और लियाकत अली प्रधानमंत्री बने। भारत के गवर्नर जनरल लार्ड माउंट बेटन और प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू बने।

IMP. QUESTIONS

  1. स्वदेशी आन्दोलन का संबंध किससे है?-1905 में बंगाल के विभाजन
  2. गांधीजी अपना राजनैतिक गुरु किसे मानते थे? –गोपाल कृष्ण गोखले
  3. भारत में गांधीजी का प्रथम सत्याग्रह कहाँ हुआ था?–चंपारण
  4. वह प्रथम भारतीय कौन थे जो ब्रिटिश हाऊस ऑफ कॉमन्सके सदस्य चुने गए? —दादाभाई नौरोजी  
  5. शांतिपूर्ण प्रतिरोध’ (सत्याग्रह) का सिद्धांत किसने प्रतिपादित किया था? —अरबिंद घोष
  6. गांधीजी के विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार के आंदोलन का लक्ष्य था -कुटीर उद्योगों को प्रोत्साहन
  7. सुभाष चन्द्र बोस ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से निकलने के बाद किस पार्टी की स्थापना की थी?   फारवर्ड ब्लॉक
  8. 1916 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और मुस्लिम लीग एक-दूसरे के निकट आ गए थे` —लखनऊ
  9. जलियांवाला बाग हादसे से कौनसा ब्रिगेडियर संबद्ध था? —जनरल डायर
  10. लाला लाजपतराय किसके विरुद्ध प्रदर्शन कर रहे थे जब वे पुलिस की नृशंसता का शिकार हुए? —साइमन कमीशन
  11. पूना समझौता (1932) किसके बीच हुआ था? —गांधी व अंबेडकर
  12. ऑल इंडिया मुस्लिम लीग की स्थापना किसने की थी? —आगा खान
  13. भारत के राष्ट्रवादी नेताओं ने साइमन कमीशन का बहिष्कार किया था क्योंकि- कमीशन के सभी सदस्य अंग्रेज थे गुजरात में
  14. साबरमती आश्रम’ की स्थापना गांधीजी ने किस – वर्ष की थी?_1917
  15. गांधी-इरविन समझौते पर हस्ताक्षर कब हुए थे?- 5 मार्च, 1931
  16. कौनसे गोलमेज सम्मेलन में महात्मा गांधीजी ने भाग लिया था? द्वितीय गोलमेज सम्मेलन, 1931
  17. स्वतंत्र भारत में पहली गैर-कांग्रेस सरकार किस राज्य में बनी -केरल
  18. 1939 में, सुभाषचन्द्र बोस किसे हराकर कांग्रेस पार्टी के पट्टाभि सीतारमैय्या
  19. अध्यक्ष चुने गए थे? ” –‘पूर्ण स्वराज्य’ की शपथ कांग्रेस के किस अधिवेशन में ली गई लाहौर अधिवेशन (1929)
  20. असहयोग आन्दोलन को किसके कारण स्थगित किया गया–चौरीचौरा घटना
  21. गांधी का ‘दांडी (डांडी) मार्च’ किसका हिस्सा था? -सविनय अवज्ञा आन्दोलन
  22. सर्वोदय और भूदान आंदोलन से कौन संबद्ध है?—आचार्य विनोबा भावे
  23. ‘हिन्द स्वराज’ व ‘माई एक्सपेरीमेन्ट्स विद टुथ’ पुस्तक के लेखक कौन थे? —महात्मा गांधी
  24. यंग इण्डिया (पत्र) व हरिजन (पत्र) के संपादक कौन थे?–महात्मा गांधी
  25. गांधीजी का ‘डांडी मार्च’ किस आंदोलन से संबंधित था? –नमक सत्याग्रह आंदोलन
  26. महात्मा गांधी को ‘अर्धनग्न फकीर’ किसने कहा था? —चर्चिल
  27. महात्मा गांधी ने किंस गोलमेज सम्मेलन में भाग लिया?–द्वितीय गोलमेज सम्मेलन (1931)
  28. महात्मा गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव में किसकीपराजय को अपनी हार बताया था?-पट्टाभि सीतारमैय्या
  29. किस आंदोलन के समय गांधीजी ने कहा कि ‘मेरे जीवन का यह अंतिम संघर्ष होगा’ और आंदोलनकारियों को ‘करो या मरो का नारा’ दिया? भारत छोड़ो आंदोलन
  30. महात्मा गांधी ने किस प्रस्ताव को उत्तर तिथीय चेक की संज्ञा –क्रिप्स प्रस्ता

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